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अटल बिहारी वाजपेयी IIITM ग्वालियर में AI समिट शुरू, स्वास्थ्य सेवा से स्मार्ट सिटी तक नवाचारों पर चर्चा

ग्वालियर
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर में एआई समिट 2026 का प्रथम दिवस अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में प्रारंभ हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रतिष्ठित अतिथियों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा तकनीकी नवप्रवर्तकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह,अनिरुद्ध प्रताप सिंह, प्रो. एस. एन. सिंह, प्रो. अनुराग श्रीवास्तव तथाश्याम अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया।

एआई समिट 2.0 के प्रथम दिवस के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित विभिन्न विषयों पर गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस अवसर पर नवाचार, रचनात्मकता एवं तकनीकी कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एआई सिनर्जी हैकाथॉन का आयोजन किया गया, जिसमें 40 से अधिक छात्र दलों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके पश्चात सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें इंजीनियरिंग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग श्रीवास्तव ने सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत एवं सम्मान किया। साथ ही, विभाग की ओर से संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. सिंह को पुष्पगुच्छ भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताअनिरुद्ध प्रताप सिंह ने “एआई: समस्या, नैतिकता और मानवता का भविष्य” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में मानव बुद्धिमत्ता, रोजगार तथा डिजिटल विश्वास के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर से वैश्विक स्तर तक विकास की संभावनाओं को साकार करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका को रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विविध आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। भारतीय सेना के सेना पदक (शौर्य) से सम्मानित लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह ने “रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: एल्गोरिदम से परिचालनात्मक बढ़त तक” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, आँकड़ा-आधारित रणनीति, त्वरित निर्णय-निर्माण तथा मानवीय नियंत्रण एवं सुरक्षा से जुड़े महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत को वैश्विक मॉडलों पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने मानव बुद्धिमत्ता, रोजगार तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने संस्थान के शोधार्थियों के साथ सार्थक संवाद भी किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल का विकास भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मध्याह्न भोजन के पश्चात ग्वालियर स्मार्ट सिटी से जुड़ेगौरव शाक्य ने “ग्वालियर स्मार्ट सिटी की पहलें, चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शहर के विकास, तकनीकी नवाचार तथा स्मार्ट सिटी से संबंधित विभिन्न पहलों, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

इसके पश्चातवैभव,अक्षत एवंकार्तिक ने संस्थान के कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित नवोद्यम सैंगिलेंस (Sangillence) का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने नवोद्यम के कार्यों एवं उद्देश्यों से अवगत कराया तथा नवाचार और उद्यमिता के महत्त्व को रेखांकित किया।

तत्पश्चात आरंभ चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर की निदेशक डॉ. सुकृति मिश्रा ने “स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस क्षेत्र में एआई का उपयोग केवल चैटजीपीटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अनेक अन्य महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग भी हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

दिन के अंतिम सत्र में फिलिप्स में वरिष्ठ वास्तुकार (सीनियर आर्किटेक्ट) के पद पर कार्यरतवैभव शर्मा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इस क्षेत्र से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए तथा तकनीकी विकास में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला।

इसके अतिरिक्त, चयनित शोध-पत्रों की प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों को अपने शोध कार्यों और विचारों को साझा करने का अवसर मिला। इसके पश्चात चाय-विश्राम के साथ प्रथम दिवस के कार्यक्रमों का समापन हुआ। डॉ. जीवराज एस. ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस सम्मेलन के संरक्षक संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. सिंह हैं, जबकि सम्मेलन के सामान्य अध्यक्ष प्रो. अनुराग श्रीवास्तव हैं। आयोजन अध्यक्षों के रूप में डॉ. यशवंत पटेल, डॉ. जीवराज एस. तथा डॉ. रोहित सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजन समिति में प्रो. जॉयदीप धर, डॉ. प्रज्ञा शुक्ला सहित अन्य सदस्य भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

सम्मेलन के सफल आयोजन में संस्थान के शोधार्थियों तथा विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों ने स्वयंसेवकों के रूप में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सहयोग से कार्यक्रम का संचालन सुचारु रूप से संपन्न हुआ।

एआई समिट 2026 का प्रथम दिवस कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीकी नवाचार, नैतिकता, उद्यमिता तथा स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध, नवाचार एवं सहयोग को बढ़ावा देना तथा भारत को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। उक्त जानकारी संस्थान की मीडिया प्रभारी श्रीमती दीपा सिंह सिसोदिया के द्वारा प्रदान की गयी।

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