छत्‍तीसगढ़

नई लेदरी में गूंजा नात-ए-पाक का पैगाम, मोहब्बत और भाईचारे से रोशन हुईं गलियां

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

कभी-कभी कोई दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं होता, बल्कि वह दिन दिलों में उतरकर इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और रहमत का पैगाम बन जाता है। नई लेदरी में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद और उनकी शिक्षाओं को समर्पित ईद मिलादुन्नबी का पर्व बड़े ही उत्साह, अकीदत और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा नई लेदरी मानो मोहब्बत और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया।

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर बच्चे हों या बुजुर्ग, नौजवान हों या महिलाएं, हर चेहरे पर उत्साह और हर दिल में अपने प्यारे नबी की मोहब्बत नजर आई। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम और रैली में शामिल होकर अपनी अकीदत का इजहार किया। गलियों और चौक-चौराहों से गुजरती रैली ने पूरे क्षेत्र में एक ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना दिया, जिसमें नात-ए-पाक की मधुर आवाजें दिलों को छूती रहीं।

इस भव्य रैली का शुभारंभ मौलाना असलम नूरी एवं रिजवियां अंजुमन कमेटी के सदर शमशाद कादरी के नेतृत्व में रजा मस्जिद प्रांगण से हुआ। रैली जैसे-जैसे आगे बढ़ी, लोगों का उत्साह और उमंग भी बढ़ता गया। नात-ए-पाक की सुरीली आवाजों के बीच श्रद्धालु पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद में अपनी भावनाएं व्यक्त करते नजर आए।

रैली एसईसीएल मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय होते हुए अटल चौक, झरझरा चौक, गांधी चौक तथा नई लेदरी की विभिन्न गलियों और चौक-चौराहों से होकर गुजरी। रास्ते भर अकीदतमंदों की मौजूदगी और नात-ए-पाक की गूंज ने माहौल को पूरी तरह खुशनुमा और भावुक बना दिया।

इस दौरान ऐसा लग रहा था मानो नई लेदरी की हर गली अपने रहमत के पैगाम को महसूस कर रही हो। बच्चों के चेहरों पर मासूम खुशी, बुजुर्गों की आंखों में अकीदत और युवाओं के उत्साह ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया। रैली में शामिल लोगों ने अपने आचरण और अनुशासन के माध्यम से मोहब्बत, शांति और भाईचारे का खूबसूरत संदेश भी दिया।

ईद मिलादुन्नबी केवल जश्न मनाने का अवसर नहीं, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं को याद करने का पवित्र अवसर है। उन्होंने इंसान को इंसान से मोहब्बत करना, जरूरतमंदों की मदद करना, कमजोरों का सहारा बनना, सच्चाई का साथ देना और समाज में अमन व भाईचारा कायम रखना सिखाया। यही वजह है कि उनकी याद में आयोजित होने वाला यह पर्व लोगों के दिलों को जोड़ने और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है।

रैली का समापन पुनः रजा मस्जिद प्रांगण में हुआ। यहां पहुंचने के बाद भी लोगों में उत्साह और श्रद्धा का भाव बना रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब दिलों में मोहब्बत हो और जुबां पर नात-ए-पाक हो, तो पूरा वातावरण इबादत और भाईचारे की खुशबू से महक उठता है।

नई लेदरी में आयोजित यह ईद मिलादुन्नबी समारोह निश्चित रूप से लंबे समय तक लोगों की यादों में बसा रहेगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत, रहमत और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर बनकर सामने आया। आज नई लेदरी की गलियों में गूंजती नात-ए-पाक की आवाजों ने मानो यही संदेश दिया कि दुनिया में सबसे खूबसूरत रिश्ता वही है, जो इंसान को इंसान से जोड़ता है और दिलों में मोहब्बत पैदा करता है।

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