देश

बिहार में KYP केंद्रों पर संकट, 1700 से अधिक केंद्र बंद होने की आशंका

पटना
कुशल युवा कार्यक्रम के तहत बीते दस वर्षों से युवाओं का कौशल विकास करने वाले 17 सौ से अधिक केंद्रों पर अब ताला लटक जाएगा। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने अब इस कार्यक्रम में संशोधन कर तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। विभाग के इस निर्णय से केंद्र चला रहे संचालकों के 200 करोड़ डूब जाएंगे। साथ ही लगभग 10 हजार लोगों का बेरोजगार होना भी तय है। दरअसल, बीते दिनों राज्य कैबिनेट से कुशल युवा कार्यक्रम संशोधन के साथ अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का प्रस्ताव पारित हुआ।

इसके बाद केवाईपी केंद्र चला रहे संचालकों ने जब विभागीय अधिकारियों से संपर्क साधा तो साफ कर दिया गया कि उनके केंद्रों में नए पाठ्यक्रमों की पढ़ाई नहीं होगी। विभाग ने यह भी साफ कर दिया कि यह कार्यक्रम राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, प्रखंड कौशल विकास केंद्रों, प्रखंड स्तरीय राजकीय महाविद्यालयों एवं अन्य संस्थान तथा सरकार के अन्य संसाधनों आदि की उपलब्ध अवसंरचना के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

युवाओं को वर्तमान उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप उच्चस्तरीय और नई तकनीक वाले क्षेत्रों में, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है मसलन-सोलर, ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड वर्कर, लैब तकनीशियन, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन, ब्यूटी एवं वेलनेस, बेकरी, इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, टैली, विदेशी भाषा एवं उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

हालांकि, विभाग ने यह जरूर कहा कि इस प्रक्रिया में पूर्व में नवीनीकरण योग्य पाए गए कौशल विकास केन्द्रों के संचालकों/एजेंसियों को चयन की पात्रता निर्धारण के निमित्त अपनायी जाने वाली प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग का कहना है कि कुशल युवा कार्यक्रम के पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप संशोधित कर कुशल युवा कार्यक्रम तकनीकी के रूप में लागू किया जा रहा है। इससे इन केंद्रों से प्रशिक्षित बच्चों को देश में कहीं भी रोजी-रोजगार मिल सकेगा।

सात निश्चय-1 से चल रहा प्रशिक्षण
सात निश्चय एक के तहत 2016 में आर्थिक हल युवाओं का बल के तहत युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के लिए कुशल युवा कार्यक्रम के तहत कौशल विकास केंद्र का संचालन हो रहा था। सात निश्चय दो में भी इसका संचालन जारी रहा। अब तक लगभग 33 लाख से अधिक छात्रों ने इन केंद्रों में नामांकन कराया। इसमें से लगभग 26 लाख को प्रशिक्षण दिया गया है। विभाग ने पहले ही 400 से अधिक केंद्रों को बंद कर दिया है। अब संशोधन होने के बाद बाकी 13 सौ केंद्रों के बंद होने का खतरा मंडरा गया है। सवाल यह है कि जब एक दशक से बिहार में इन केंद्रों का संचालन हो रहा था तो फिर इसे अचानक से बंद कर लोगों की 200 करोड़ की पूंजी क्यों पर दांव लगाई जा रही है।

साथ ही क्या 26 लाख बच्चे जिन्हें प्रशिक्षण मिला, वे अब नए सिरे से प्रशिक्षण की बात नहीं करेंगे। ताकि उन्हें भी देश के अन्य राज्यों में रोजी-रोजगार मिल सके। सरकार के इस कदम में बिहार के दसवीं पास गरीब बच्चे कंप्यूटर, भाषा और संवाद का प्रशिक्षण हासिल नहीं कर सकेंगे। कुशल युवा कार्यक्रम बचाओ अभियान समिति के राज्य संयोजक, राहुल सिंह कैबिनेट से कुशल युवा कार्यक्रम का विस्तार हुआ है। इसलिए पहले से चल रहे कौशल विकास केंद्रों पर शीघ्र प्रशिक्षण शुरू किया जाए। सभी केंद्रों को इस सत्र के लिए नवीनीकरण किया जाए, क्योंकि दो लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हो चुके हैं। अगर हमारे साथ न्याय नहीं हुआ तो हम सभी संगठित होकर लड़ाई लड़ेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button