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विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चंदा चढ़ावा चोरी को लेकर बिगड़ी छवि को सुधारने में जुटेगा संत समाज

विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चंदा चढ़ावा चोरी को लेकर बिगड़ी छवि को सुधारने में जुटेगा संत समाज 

लखनऊ 
 राम मंदिर में चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं के मामले से उपजे विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में गुरुवार को करीब 300 संतों और महंतों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस बैठक को हिंदू समाज में पैदा हुई शंकाओं और असंतोष को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक में विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लगभग 300 संत शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार बैठक में राम मंदिर में चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं की जांच की प्रगति, राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की अब तक की कार्रवाई और श्रद्धालुओं के बीच पैदा हुए अविश्वास को दूर करने के उपायों पर चर्चा हुई। संतों के सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति भी तय की गई।

सूत्रों की मानें तो राम मंदिर चंदा संग्रह में कथित गड़बड़ियों को संघ परिवार गंभीरता से ले रहा है। भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है और ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। अब तक इस मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पहले चंपत राय के चालक रहे हैं, जबकि गिरफ्तार आरोपियों में अनिल मिश्रा के दो रिश्तेदार भी शामिल हैं।

राम मंदिर का निर्माण लंबे समय से संघ परिवार और भाजपा के वैचारिक एजेंडे का प्रमुख मुद्दा रहा है। ऐसे में चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर पार्टी के भीतर भी चिंता बताई जा रही है।

इस मुद्दे पर विपक्ष भी भाजपा को घेर रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्ता में आने पर अयोध्या की गरिमा बहाल करने का वादा किया है। वहीं भाजपा उन्हें 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई की याद दिलाकर जवाब दे रही है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अयोध्या (फैजाबाद) सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें 2019 के 62 से घटकर 33 रह गई थीं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने 37 सीटें जीतकर राज्य में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद भाजपा और संघ परिवार के लिए एक अहम राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत गौरी शंकरदास जी ने कहा कि जिनका सनातन धर्म एवं मंदिर से कभी सम्बन्ध नहीं था, वे आज मंदिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा कर रहे हैं। हम सभी उस महापुरुष के साथ हैं, जो अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है, हम सब एकजुट होकर उसका पुरज़ोर विरोध करेंगे।

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