मध्‍यप्रदेश

मध्य प्रदेश के इकलौते यहूदी कब्रिस्तान पर अतिक्रमण का आरोप, तोड़फोड़ से भू-माफियाओं पर उठे सवाल

जबलपुर
 मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है।

रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button