मध्‍यप्रदेश

बड़वानी में युवती को 25-30 युवक बाइक पर उठाकर ले गए! वायरल VIDEO से हड़कंप, जांच में ‘देजा’ प्रथा का एंगल

बड़वानी

बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जलगोन में एक युवती को कुछ युवकों द्वारा जबरन बाइक पर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 7 जुलाई का है। वीडियो सामने आने के बाद राजपुर पुलिस ने तत्काल गांव पहुंचकर युवती के परिजनों से बातचीत की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब 25 से 30 युवक युवती को अपने साथ ले गए थे। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि पुलिस ने मामले की सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

राजपुर थाना प्रभारी माधवसिंह ठाकुर ने बताया कि परिजनों और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में मामला आदिवासी समाज में प्रचलित 'देजा प्रथा' से जुड़ा होने की आशंका सामने आई है। इस परंपरा के तहत विवाह के दौरान लड़के पक्ष की ओर से लड़की पक्ष को पूर्व निर्धारित राशि दी जाती है।

बेजा प्रथा को लेकर बताया जा रहा विवाद
जानकारी के अनुसार, युवती का रिश्ता निहाली गांव निवासी हुकुम रावत से तय हुआ था. आदिवासी समाज में प्रचलित बेजा प्रथा के अनुसार, युवक पक्ष ने युवती के परिजन को करीब 2 लाख रुपए दिए थे. आरोप है कि इसके बावजूद लड़की पक्ष युवती को लड़के के घर नहीं भेज रहा था. इसी विवाद के चलते हुकुम रावत अपने 25 से 30 साथियों के साथ इंद्रपुर गांव पहुंचा और युवती को खेत से जबरन अपने साथ ले गया। 

वीडियो में मौजूद कुछ लोगों की बातचीत भी सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि बेजा हो चुका है, रुपए भी ले लिए हैं, फिर भी लड़की को नहीं भेज रहे थे, इसलिए उसे ले जाया गया. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। 

पुलिस ने शुरू की जांच, अभी तक नहीं मिली शिकायत
राजपुर थाना प्रभारी माधव सिंह ठाकुर ने बताया कि, ''मामले में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. इसके बावजूद वीडियो को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम को गांव भेजा गया है. पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। 

आदिवासी विकास परिषद ने उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि राहुल सोलंकी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि, ''यदि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना सही है तो यह कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.'' उन्होंने पुलिस प्रशासन से 24 घंटे के भीतर निष्पक्ष जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न फैले और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके। 

पुलिस के मुताबिक, प्राथमिक जानकारी यह भी मिली है कि विवाह के बाद युवती अपने ससुराल नहीं जा रही थी। इसी कारण कथित तौर पर ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश की। हालांकि इस दावे की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने एसडीओपी समेत अन्य अधिकारियों को भी मौके पर भेजा है। एसपी ने बताया कि फिलहाल सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है बेजा प्रथा?
निमाड़ अंचल के कुछ आदिवासी समुदायों में बेजा प्रथा लंबे समय से प्रचलित सामाजिक परंपरा मानी जाती है. इसके तहत युवक-युवती की सहमति से विवाह या साथ रहने की प्रक्रिया को समाज की मान्यता दी जाती है. बाद में दोनों परिवारों और समाज के पंचों की मौजूदगी में आपसी समझौते के जरिए रिश्ते को स्वीकार किया जाता है. कई मामलों में आर्थिक लेन-देन या सामाजिक दंड (जुर्माना) भी तय किया जाता है। 

हालांकि किसी भी परंपरा या सामाजिक प्रथा के नाम पर किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन ले जाना या बलपूर्वक बंधक बनाना कानूनन अपराध है. यदि जांच में जबरदस्ती या अन्य अपराध साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी. यह स्पष्ट होना बाकी है कि युवती की सहमति थी या नहीं, वायरल वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और घटना के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं. प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

 

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