देश

जमीन-मकान के सौदों पर आयकर विभाग की कड़ी नजर, रजिस्ट्री रिकॉर्ड की हो रही जांच

लखनऊ
यूपी में जमीन-मकान की खरीद-फरोख्त पर नजर रखी जा रही है। आयकार की नजर है। बागपत में बीते वर्षों में मिली खामियों और सर्वे की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही रजिस्ट्री कार्यालयों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। टीडीएस देयता, रजिस्ट्री संबंधी विवरण और वित्तीय लेनदेन के ब्योरे में दर्ज प्रविष्टियों की बारीकी से जांच की जा रही है। आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई के अधिकारी हर पहलू की समीक्षा कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान अवधि तक के रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के आधार पर टीडीएस देयता निर्धारित होती है। इसके लिए पैन कार्ड नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। हालांकि जांच में सामने आया कि कई मामलों में इन औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। इसी लापरवाही को देखते हुए जनपद की विभिन्न तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों का सर्वे किया गया। यदि बैनामा की गई संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है तो संबंधित सब रजिस्ट्रार कार्यालय को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के तहत इसकी सूचना आयकर विभाग को देनी होती है।

निर्धारित प्रारूप में यह विवरण तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है। वहीं 50 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति के सौदे में खरीदार को विक्रेता के भुगतान से एक प्रतिशत टीडीएस काटना होता है।

नियमों के तहत फार्म 60 भरना अनिवार्य
यदि किसी संपत्ति का सौदा 10 लाख रुपये या उससे अधिक का है और संबंधित व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है तो आयकर नियमों के तहत फार्म-60 भरना अनिवार्य है। इसमें सौदा करने वाले व्यक्ति की पहचान और निवास संबंधी विवरण दर्ज किए जाते हैं। इन मामलों की जानकारी एसएफटी फाइलर द्वारा फार्म-61 और फार्म-61ए के माध्यम से आयकर विभाग को भेजी जाती है।

ये खामियां आईं सामने
आयकर व्यवस्था में किसानों की कृषि आय को कर से छूट प्राप्त है। जांच में पाया गया कि कुछ बिल्डरों ने इस प्रावधान का लाभ उठाने के लिए नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के करोड़ों रुपये के सौदे किए। कई मामलों में न तो टीडीएस काटा गया और न ही पैन कार्ड का विवरण दर्ज किया गया। पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) की देयता को भी नजरअंदाज किया गया। आयकर विभाग की जांच में ऐसे कई सौदे सामने आए, जिनमें बाद में टीडीएस और कैपिटल गेन टैक्स की देयता निर्धारित की गई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button