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आंखों का फड़कना महज अंधविश्वास नहीं, शरीर में छिपी इन 5 कमियों का हो सकता है संकेत

आंखों के फड़कने को ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई मामलों में यह शरीर का संकेत हो सकता है कि आपको थोड़ा आराम करना चाहिए या शरीर के इशारे को समझना चाहिए। आंखों का फड़कना आमतौर पर हानिकारक नहीं होता, लेकिन बार-बार या अधिक समय तक ऐसा होना शरीर में किसी असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि शरीर आपको क्या संकेत दे रहा है।

अगर आंखों का फड़कना कई दिनों या हफ्तों तक बना रहे, आंखों में लालिमा, सूजन या दर्द हो, आंखें बार-बार अपने आप बंद हो जाएं या चेहरे के अन्य हिस्सों में हलचल महसूस हो, तो गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अपनी जांच कराएं।
आंख फड़कने के कारण
आमतौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी इन गलत आदतों के कारण आंख फड़कती है-

    नींद की कमी- पर्याप्त आराम न मिलने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे वे फड़कने लगती हैं।
    तनाव- स्ट्रेस लेवल बढ़ने पर शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है। इसमें आंखों का फड़कना भी शामिल है।
    ज्यादा स्क्रीन टाइम- फोन और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने से आंखें थक जाती हैं और फड़कने लगती हैं।
    चाय-कॉफी या शराब का अधिक सेवन- कैफीन या शराब के ज्यादा सेवन से नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे मांसपेशियों की गति प्रभावित हो सकती है और आंख फड़कने की समस्या शुरू हो जाती है।
    पोषण की कमी- हेल्दी डाइट न लेने से भी आंखें फड़कने की समस्या हो सकती है। मैग्नीशियम, विटामिन बी12 और पोटेशियम की कमी से आंखें फड़कने की तकलीफ हो सकती है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, मेवे और डेयरी प्रोडक्ट शामिल करें।

आंख फड़कने के गंभीर संकेत
आंख फड़कना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई बार ऐसा गंभीर समस्या के कारण भी हो सकता है। यदि आंखों का फड़कना चेहरे के अन्य हिस्सों में फैल जाए या आंख अपने आप बंद होने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। कई बार आंखों के फड़कने की वजह निम्नलिखित रोग भी हो सकते हैं-
    ब्लेफेरोस्पाज्म
    पार्किंसंस
    मल्टीपल स्केलेरोसिस
    फेशियल नर्व डिसऑर्डर

शरीर के इन संकेतों नजरअंदाज न करें
शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। मन और शरीर आपस में गहरा संबंध है। अगर मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं तो इसके लक्षण शरीर पर भी नजर आते हैं।

काम या निजी जीवन का तनाव, लगातार चिंता या गहरी सोच, पर्याप्त आराम न मिलने से होने वाली मानसिक थकान, ये सभी समस्याएं सूक्ष्म रूप से शरीर को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके कारण आंखों का फड़कना शुरू हो सकता है। शरीर के इन संकेतों नजरअंदाज नहीं करना चाहिए-

    आंखों में ड्राइनेस- लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल से आंखों में ड्राईनेस की समस्या हो सकती है।
    आखों में एलर्जी या जलन- धूल और प्रदूषण के कारण आखों में एलर्जी या जलन हो सकती है।
    थकान- शरीर पर ज्यादा जोर डालने से मांसपेशियों के फड़कने की समस्या हो सकती है। आंखों का फड़कना बहुत ज्यादा थकान का संकेत हो सकता है।

आंखों का फड़कना कैसे रोकें
आंखों का फड़कना रोकने के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं-

    7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें
    स्क्रीन टाइम से ब्रेक लें
    कैफीन और शराब से परहेज करें
    मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें
    हेल्दी डाइट लें

आंख फड़कने के संकेत समझें
आंखों की मांसपेशियां बेहद संवेदनशील होती हैं। ये मामूली परेशानी से भी फड़कने लगती हैं। आंखों का फड़कना भले ही मामूली लगे, लेकिन कई बार ये शरीर की शुरुआती चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इस पर ध्यान देने से बड़ी समस्याओं को बढ़ने से पहले ठीक किया जा सकता है। पर्याप्त नींद, हेल्दी डाइट, मेडिटेशन, चाय-कॉफी और शराब से दूरी और स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करके आंखों के फड़कने की समस्या को रोका जा सकता है।

 

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