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MP में बदलेगा राज्यसभा चुनाव का गणित, भाजपा उतार सकती है तीसरा प्रत्याशी, कांग्रेस की ‘पक्की’ सीट पर टिकी नजर

भोपाल 

मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. .

एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा 
मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं। 

जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित 
राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है। 

क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी।

इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।

खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है।

एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट 
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है. 

बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके। 

एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव
इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।

 

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