देश

बिहार में काशी-अयोध्या की तर्ज पर बनेगा शिव सर्किट, प्रमुख मंदिरों को जोड़कर बनेगा शिवलोक

मुजफ्फरपुर.

बिहार की धरती अब सिर्फ ज्ञान, अध्यात्म और विरासत की पहचान भर नहीं रहेगी, बल्कि भगवान शिव के भक्तों के लिए एक भव्य आस्था गलियारे के रूप में भी विकसित होने जा रही है. राज्य सरकार ने बिहार में ‘बुद्ध सर्किट’ और ‘रामायण सर्किट’ के बाद अब ‘शिव सर्किट’ विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार कर लिया है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

विधानसभा में पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों को बेहतर सड़क और सुविधाओं से जोड़ा जाएगा. इस योजना के तहत बाबा गरीबनाथ मंदिर से लेकर अजगैबीनाथ मंदिर तक की दूरी न सिर्फ आसान होगी, बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और सुविधाजनक बन जाएगी.

विधायकों से मांगी जाएगी मंदिरों की सूची
राज्य सरकार इस योजना को पूरी तरह समावेशी और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है. पथ निर्माण मंत्री ने विधायकों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के उन मंदिरों की जानकारी उपलब्ध कराएं, जहां सावन समेत पूरे वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. इन सुझावों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे बजट और सहयोग के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. सरकार की मंशा ‘शिव सर्किट’ को पहले से विकसित धार्मिक पर्यटन मार्गों की तर्ज पर मजबूत आधार देना है. यदि यह पहल सफल होती है तो राज्य के प्रमुख शिव धामों तक श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है.

कई प्रसिद्ध शिव धाम हो सकते हैं शामिल
विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान विधायकों ने कई प्रमुख शिव मंदिरों को प्रस्तावित सर्किट में शामिल करने की मांग उठाई. इनमें मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर, मधुबनी का उगना महादेव मंदिर, सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर, गुरुआ का बैजूधाम सहित कई प्रसिद्ध शिवालयों का नाम सामने आया. इसके साथ ही पूर्वी चंपारण का सोमेश्वरनाथ मंदिर, लखीसराय का अशोक धाम और मधेपुरा स्थित सिंघेश्वर महादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को भी इस योजना में जोड़ने की बात कही गई. चर्चा के दौरान कांवर यात्रा मार्गों को बेहतर बनाने और नए कांवर पथ विकसित करने की मांग भी उठी, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बन सके.

पर्यटन विभाग का मानना है कि यदि सर्किट आकार लेता है तो बिहार में सालभर धार्मिक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और सुनियोजित प्रचार-प्रसार के जरिए राज्य के प्राचीन शिव धाम राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित हो सकते हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button